बलौदाबाजार: गोड़ा सरपंच उषा धीवर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, एसडीएम पलारी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर रोक

बलौदाबाजार: गोड़ा सरपंच उषा धीवर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर रोक, हाईकोर्ट ने एसडीएम पलारी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल (Chhatisgarh Talk)
बलौदाबाजार: गोड़ा सरपंच उषा धीवर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर रोक, हाईकोर्ट ने एसडीएम पलारी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल (Chhatisgarh Talk)

बलौदाबाजार के गोड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच उषा धीवर के खिलाफ 30 अक्टूबर को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगाई। हाईकोर्ट ने एसडीएम पलारी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल; पंचों के सत्यापन में खामी और दस्तावेज नहीं देने पर मांगा जवाब

बिलासपुर/बलौदाबाजार। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की ग्राम पंचायत गोड़ा की सरपंच उषा धीवर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। उनके खिलाफ 30 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के सम्मेलन की कार्यवाही पर अदालत ने आगामी सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी पलारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े पंचों के सत्यापन में प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने और याचिकाकर्ता को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के मामले में एसडीएम से जवाब भी मांगा है।

न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सरपंच उषा धीवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। सरपंच की ओर से अधिवक्ता हेमंत गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका (WPC No. 5458/2026) दायर कर उनके खिलाफ शुरू की गई अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

30 अक्टूबर को प्रस्तावित था अविश्वास प्रस्ताव का सम्मेलन

मामले में ग्राम पंचायत गोड़ा की सरपंच उषा धीवर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 21 अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस के आधार पर 30 अक्टूबर को अविश्वास प्रस्ताव के सम्मेलन की तारीख निर्धारित की गई थी। सरपंच ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए। अदालत ने 28 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित एसडीएम को मूल रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश के पालन में एसडीएम (राजस्व) सह विहित प्राधिकारी, पलारी अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े मूल अभिलेखों के साथ अदालत में उपस्थित हुए। इसके बाद एकलपीठ ने प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया। रिकॉर्ड की जांच के दौरान पंचों के सत्यापन और दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कमियां सामने आईं।

पंचों के सत्यापन में मिली प्रक्रियात्मक खामी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित पंचों की पहचान याचिकाकर्ता सरपंच द्वारा नहीं कराई गई थी। इसके साथ ही रिकॉर्ड में पंचों के समुचित सत्यापन से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए जाने का स्पष्ट प्रमाण भी नहीं मिला। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि एसडीएम की ओर से पंचों का सत्यापन किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन सत्यापन पत्रक यानी वेरिफिकेशन शीट पर स्वयं एसडीएम के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे। इस बिंदु को अदालत ने गंभीरता से लिया। किसी भी अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में संबंधित दस्तावेजों और सत्यापन की औपचारिकताएं महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में सत्यापन के दावे के बावजूद संबंधित पत्रक पर अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होना प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े करता है।

प्रमाणित दस्तावेज मांगने के बाद भी नहीं मिली कॉपी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। उनके अधिवक्ता हेमंत गुप्ता ने अदालत को बताया कि अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित आदेश पत्रक की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए विधिवत आवेदन दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से प्रभावित व्यक्ति को उससे संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने और कानूनी उपाय अपनाने का अवसर मिलना महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन देने के बाद भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने का मुद्दा अदालत के समक्ष रखा गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में भी एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारी को बताना होगा कि याचिकाकर्ता को संबंधित दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।

एसडीएम को तीन कार्यदिवस में व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश

सुनवाई के दौरान सामने आई प्रक्रियात्मक कमियों पर हाईकोर्ट ने एसडीएम पलारी से जवाब तलब किया है। अदालत ने उन्हें तीन कार्यदिवसों के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र यानी एफिडेविट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। एसडीएम को अपने हलफनामे में दो प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देना होगा।

  1. पहला, याचिकाकर्ता सरपंच द्वारा प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किए जाने के बावजूद संबंधित दस्तावेज उन्हें क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए?
  2. दूसरा, जब पंचों का सत्यापन किए जाने का दावा किया गया है, तो सत्यापन पत्रक पर एसडीएम के हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं?

इस निर्देश के जरिए अदालत ने संबंधित अधिकारी से रिकॉर्ड में सामने आई कमियों पर जवाब मांगा है। अब अधिकारी के हलफनामे और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आगे की सुनवाई में मामले के इन पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

30 अक्टूबर की अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया पर तत्काल रोक

हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए 21 अक्टूबर 2026 के नोटिस के तहत 30 अक्टूबर को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

अदालत के आदेश में कहा गया कि संबंधित एसडीएम (राजस्व) की ओर से स्पष्ट रूप से गलती हुई है। इसी आधार पर प्रस्तावित सम्मेलन की कार्यवाही को आगामी सुनवाई तक स्थगित करने का निर्देश दिया गया।

इस आदेश के बाद ग्राम पंचायत गोड़ा की सरपंच उषा धीवर के खिलाफ 30 अक्टूबर को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव का सम्मेलन फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकेगा। हालांकि, यह अंतरिम रोक है। इसे मामले का अंतिम फैसला या अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को स्थायी रूप से निरस्त किया जाना नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले दस्तावेजों तथा जवाब पर निर्भर करेगा।

शासकीय अधिवक्ता को दस्तावेजों की छायाप्रति जमा करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता अखिलेश कुमार को भी अदालत में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की छायाप्रतियां जमा करने के निर्देश दिए हैं। इससे मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों का परीक्षण आगे भी किया जा सकेगा। अदालत ने एसडीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है, वहीं सरकारी पक्ष को भी प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

ग्राम पंचायत गोड़ा की सरपंच उषा धीवर की याचिका पर अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान एसडीएम पलारी के व्यक्तिगत हलफनामे और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी। इस पूरे मामले में अब तीन सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। पंचों का सत्यापन किस प्रक्रिया से किया गया था? सत्यापन पत्रक पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर क्यों नहीं थे? और प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता को दस्तावेज क्यों नहीं मिले? हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारी को देना होगा। फिलहाल गोड़ा सरपंच को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही से राहत मिली है, लेकिन मामले का अंतिम कानूनी नतीजा 19 नवंबर की अगली सुनवाई और उसके बाद होने वाली कार्यवाही से स्पष्ट होगा।

इस मामले ने ग्राम पंचायतों में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजी पारदर्शिता, पंचों के सत्यापन और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को एक बार फिर महत्वपूर्ण बना दिया है।


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