निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला: धान के बोरों में रेत-कंकड़ मिलाने का वीडियो वायरल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला: धान के बोरों में रेत-कंकड़ मिलाने का वीडियो वायरल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे (Chhattisgarh Talk)
निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला: धान के बोरों में रेत-कंकड़ मिलाने का वीडियो वायरल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे (Chhattisgarh Talk)

बलौदाबाजार के निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला सामने आया है। धान के बोरों में रेत और कंकड़ मिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में 346 कट्टा का अंतर मिला। फड़ मुकरदम ने भी रेत मिलाने की बात कबूल की।

बलौदाबाजार: भाटापारा क्षेत्र की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। निपनिया धान उपार्जन केंद्र में सामने आए एक बड़े घोटाले ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में धान के बोरों में रेत, मिट्टी और कंकड़-पत्थर मिलाकर वजन बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन को जांच के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन जांच प्रक्रिया भी कई सवाल छोड़ती नजर आई। जांच के लिए गठित छह सदस्यीय टीम में से केवल दो अधिकारी ही मौके पर पहुंचे, जबकि बाकी चार अधिकारी अनुपस्थित रहे। इससे पूरे मामले में जांच की गंभीरता और निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हो गया है।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से खुला मामला

पूरा मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में धान के बोरों को खोलकर उनमें रेत और कंकड़ मिलाते हुए दिखाया गया है। आरोप है कि यह काम धान का वजन बढ़ाने के लिए किया जा रहा था ताकि खरीदी की मात्रा कागजों में ज्यादा दिखाई जा सके। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि ऐसी गतिविधियां केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास के अन्य धान खरीदी केंद्रों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां हो सकती हैं। वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी मेहनत की फसल के साथ इस तरह का खेल न केवल किसानों के साथ अन्याय है बल्कि सरकारी व्यवस्था के साथ भी धोखा है।

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प्रशासन ने गठित की संयुक्त जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला खाद्य विभाग ने छह सदस्यीय संयुक्त जांच टीम गठित की। टीम में खाद्य और सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ मंडी विभाग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था।

जांच समिति में सहायक खाद्य अधिकारी लक्ष्मण कश्यप, सहकारिता विस्तार अधिकारी माखन सिंह कंवर, खाद्य निरीक्षक गुलशन अनंत, शाखा प्रबंधक सिमगा जे.आर. लहरे, शाखा प्रबंधक निपानिया अनीता पांडे और मंडी उपनिरीक्षक प्रफुल्ल मांझी को शामिल किया गया।

लेकिन जब जांच का समय आया तो समिति के छह सदस्यों में से केवल दो अधिकारी ही मौके पर पहुंचे। बाकी अधिकारियों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों का कहना है कि जब इतने गंभीर आरोप लगे हों, तब पूरी टीम का मौके पर मौजूद रहना जरूरी था।


रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में चौंकाने वाला अंतर

जांच के दौरान अधिकारियों ने कंप्यूटर रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया। इसी दौरान एक बड़ा अंतर सामने आया।

रिकॉर्ड के अनुसार निपनिया धान उपार्जन केंद्र में कुल 2298 कट्टा धान दर्ज था, लेकिन मौके पर लगभग 2600 कट्टा धान पाया गया। यानी रिकॉर्ड की तुलना में 346 कट्टा धान अधिक मिला। यह अंतर प्रशासन के लिए भी हैरान करने वाला था। इतनी बड़ी मात्रा में धान का अंतर मिलना इस बात की ओर संकेत करता है कि या तो रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या फिर जानबूझकर हेरफेर किया गया है।


प्रभारी की सफाई पर उठे सवाल

स्टॉक में अंतर मिलने पर फड़ प्रभारी लीलाराम सेन ने सफाई देते हुए कहा कि चूहों द्वारा बोरी काटे जाने के कारण फटे बोरे उठाने से स्टॉक बढ़ गया। हालांकि यह तर्क जांच के दौरान कई लोगों को संतोषजनक नहीं लगा। क्योंकि सहकारिता विभाग की पहले की जांच में स्थिति बिल्कुल अलग बताई गई थी।


पहले कम मिला था धान, अब ज्यादा कैसे?

सहकारिता विभाग द्वारा की गई एक प्राथमिक जांच में 152 कट्टा धान कम पाया गया था। लेकिन बाद में हुई जांच में 346 कट्टा धान अधिक मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अंतर केवल तकनीकी गलती नहीं हो सकता। किसानों का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव या साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई हो सकती है।

निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला: जांच टीम की जांच रिपोर्ट (Chhattisgarh Talk)
निपनिया धान उपार्जन केंद्र में बड़ा घोटाला: जांच टीम की जांच रिपोर्ट (Chhattisgarh Talk)

फड़ मुकरदम ने कबूल की सच्चाई

जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब फड़ मुकरदम दुलारी निषाद ने अधिकारियों के सामने बयान दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रभारी के कहने पर लगभग 20 से 25 कट्टा धान के बोरों में रेत मिलाई गई थी। यह कबूलनामा पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। यदि यह आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी खरीदी व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मामला होगा बल्कि किसानों के साथ धोखाधड़ी भी माना जाएगा।


पहले मिले सबूत बाद में गायब होने का आरोप

किसानों का आरोप है कि पहली जांच के दौरान जिन बोरों में रेत और कंकड़ पाए गए थे, वे बाद की जांच के समय वहां नहीं मिले। ग्रामीणों का कहना है कि इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि मामले के सबूत मिटाने की कोशिश की गई है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।


सोसायटी अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल

मामले में निपनिया धान उपार्जन केंद्र सोसायटी के अध्यक्ष धनीराम साहू की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। किसानों का आरोप है कि जब इस गड़बड़ी की शिकायत की गई तो अध्यक्ष ने फोन नहीं उठाया और बाद में फोन बंद कर दिया। कुछ किसानों ने यह भी दावा किया कि रेत ट्रैक्टर से लाकर धान के बोरों में मिलाई गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।


विधायक ने किया मौके का निरीक्षण

मामले की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्रीय विधायक इन्द्र साव भी धान उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से जानकारी ली। विधायक ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो इसे विधानसभा में उठाया जाएगा।


8 गाड़ी धान बाहर भेजे जाने का आरोप

इधर विधायक प्रतिनिधि जितु ठाकुर ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मामला सामने आने के बाद भी करीब आठ गाड़ी धान केंद्र से बाहर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि इस धान की कीमत लगभग 30 लाख रुपये से अधिक हो सकती है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है।


जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी

सहकारिता विभाग के अधिकारी एम.एस. कंवर ने बताया कि जांच के दौरान धान के बोरों में रेत मिलाने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। साथ ही मामले के निष्कर्ष आने तक संबंधित प्रभारी को पद के प्रभाव से दूर रखने की कार्रवाई भी की जाएगी।


खरीदी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी गड़बड़ियां भविष्य में भी जारी रह सकती हैं। ग्रामीणों और किसानों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि सरकारी योजनाओं में जनता का भरोसा बना रहे। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

📍बलौदाबाजार से चंदू वर्मा और सत्यनारायण पटेल की ग्राउंड रिपोर्ट

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
✉️ chhattisgarhtalk@gmail.com | ☎️ +91 9111755172


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