बलौदाबाजार आगजनी और हिंसा मामले में डेढ़ साल बाद बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार।
बलौदाबाजार: 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में हुई आगजनी, हिंसा और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की घटना एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब डेढ़ साल बाद पुलिस की ओर से की गई ताजा कार्रवाई ने इस बहुचर्चित मामले को फिर से प्रशासनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित बघेल को बलौदाबाजार सिटी कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
अमित बघेल की गिरफ्तारी को इस मामले की अब तक की सबसे बड़ी और अहम कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सीधे बलौदाबाजार जिला सत्र न्यायालय में पेश किया गया। इस कार्रवाई के बाद जिले में पुलिस सतर्कता बढ़ा दी गई है और कोतवाली थाना तथा आजाक थाना क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।
जेल से रिहा होते ही गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अमित बघेल को इससे पहले भी पूछताछ के दायरे में रखा गया था। हाल ही में कोतवाली पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के दो बड़े पदाधिकारियों को हिरासत में लिया था। इसी सिलसिले में अमित बघेल जेल से छूटने के बाद जैसे ही बलौदाबाजार पहुंचे, पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का कहना है कि अमित बघेल की भूमिका 10 जून 2024 की हिंसा और आगजनी की घटना में संदिग्ध रही है और जांच में उनके खिलाफ अहम साक्ष्य सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
क्या है 10 जून 2024 का बलौदाबाजार आगजनी कांड
10 जून 2024 को बलौदाबाजार शहर अचानक हिंसा की आग में झुलस गया था। एक आंदोलन के दौरान हालात बेकाबू हो गए और देखते ही देखते आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आग लगा दी गई थी। संयुक्त जिला कार्यालय, तहसील कार्यालय में भारी तोड़फोड़ की गई। कई सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। शहर के प्रमुख इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और प्रशासन को हालात काबू में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा था।
यह घटना छत्तीसगढ़ के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक हिंसा की घटनाओं में गिनी जाती है।
13 एफआईआर, 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां
बलौदाबाजार आगजनी और हिंसा मामले में अब तक कुल 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में 200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इन एफआईआर में कांग्रेस, भीम आर्मी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुड़े कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। पुलिस ने ज्यादातर मामलों में चालान पेश कर दिए हैं और कई मामलों में गवाही की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
इसके बावजूद अमित बघेल जैसे बड़े नाम की गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि पुलिस अब भी इस मामले में नए सिरे से कड़ियां जोड़ने और जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रही है।
पहले भी हो चुकी हैं अहम गिरफ्तारियां
इससे पहले छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव और संगठन मंत्री दिनेश वर्मा को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इन गिरफ्तारियों के बाद संगठन की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित बघेल की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि पुलिस इस मामले में किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
कोर्ट में पेशी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें भारी सुरक्षा के बीच जिला सत्र न्यायालय में पेश किया। कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को आशंका थी कि गिरफ्तारी के बाद समर्थकों की ओर से विरोध प्रदर्शन या हंगामा किया जा सकता है। इसी वजह से कोतवाली थाना और आजाक थाना क्षेत्र में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है।
कुछ राजनीतिक नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई देर से जरूर हुई है, लेकिन जरूरी थी। वहीं कुछ इसे राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई के रूप में भी देख रहे हैं।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बलौदाबाजार आगजनी कांड एक गंभीर मामला है, जिसमें सरकारी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है और कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
पुलिस के मुताबिक,
“जांच के दौरान जो भी साक्ष्य सामने आए हैं, उनके आधार पर कार्रवाई की जा रही है। किसी भी व्यक्ति को केवल उसके पद या पहचान के आधार पर बख्शा नहीं जाएगा।”
पुलिस का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
प्रशासन के लिए चुनौती
बलौदाबाजार आगजनी कांड प्रशासन के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। घटना के बाद जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
अब डेढ़ साल बाद फिर से शुरू हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि प्रशासन इस मामले को पूरी तरह खत्म करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए दबाव में है।
जनता की नजर आगे की कार्रवाई पर
अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस इस मामले में पूरी सच्चाई तक पहुंच पाएगी या यह कार्रवाई केवल कुछ चुनिंदा नामों तक सीमित रह जाएगी।
बलौदाबाजार की जनता, पीड़ित व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और आम लोग अब इस मामले में ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
निष्कर्ष
बलौदाबाजार आगजनी और हिंसा मामला भले ही डेढ़ साल पुराना हो, लेकिन अमित बघेल की गिरफ्तारी ने इसे फिर से ताजा कर दिया है। यह गिरफ्तारी न सिर्फ जांच की दिशा को प्रभावित करेगी, बल्कि जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी इसका असर दिखेगा।
अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया पर टिकी हुई है। यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला अपने अंजाम तक पहुंचेगा या फिर एक बार फिर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझकर रह जाएगा।
📍बलौदाबाजार से चंदु वर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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