बलौदाबाजार आगजनी 2024 मामले में बलौदाबाजार पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव और संगठन मंत्री दिनेश वर्मा को हिरासत में लिया। बिना सूचना और कारण बताये हुई गिरफ्तारी पर राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल खड़े। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और चर्चित बलौदाबाजार आगजनी कांड में पुलिस ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। 10 जून 2024 को हुए बलौदाबाजार आगजनी और हिंसा मामले में पुलिस ने घटना के लंबे समय बाद एक बार फिर कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को की गई ताजा कार्रवाई ने पूरे जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री दिनेश वर्मा को हिरासत में लिया है। हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस हिरासत की खबर फैलते ही कोतवाली थाना के सामने जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो रहे है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना कारण बताए उनके नेताओं को हिरासत में लिया है।
बिना प्रेस नोट, बिना कारण… पुलिस की स्पष्ट जानकारी के अभाव में सवालों के घेरे में कार्रवाई
शनिवार को बलौदाबाजार पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ज्यादातर मामलों में चालान पेश हो चुके हैं, गवाही की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो फिर घटना के लंबे समय बाद यह पुलिस हिरासत में लिया गया क्यों?
पुलिस ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि
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अजय यादव और दिनेश वर्मा की पुलिस हिरासत किस एफआईआर में की रहा रही
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क्या यह नई एफआईआर है या पुराने मामले में सप्लीमेंट्री एक्शन
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क्या कोई नया सबूत सामने आया है
पुलिस की इस चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। फिलहाल पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है।
लंबे समय बाद क्यों जागी पुलिस?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि 10 जून 2024 को हुई इस भीषण हिंसा के करीब घटना के लंबे समय बाद अचानक पुलिस को यह कार्रवाई क्यों करनी पड़ी? जब इस मामले में पहले ही 200 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, 13 अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं और अधिकांश मामलों में चालान भी पेश किए जा चुके हैं, तो फिर अब इन दो बड़े पदाधिकारियों को पुलिस ने उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया है? क्या यह नई जांच का नतीजा है या फिर राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई? पुलिस इस पर चुप्पी साधे हुए है।
क्रांति सेना के दो बड़े पदाधिकारी हिरासत में
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव को पुलिस हिरासत में लिया गया है। अजय यादव को संगठन में एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता है और वे जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल के करीबी बताए जाते हैं। उनके साथ जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री दिनेश वर्मा को भी हिरासत में लिया गया है। दोनों की पुलिस हिरासत की खबर सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, पुलिस की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोनों पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं और उन्हें किस आधार पर हिरासत में गया है।
बिना सूचना गिरफ्तारी का आरोप
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला उपाध्यक्ष लिलेंद्र साहू ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा,“हमारे संगठन के अध्यक्ष और पदाधिकारी को बलौदाबाजार साइबर पुलिस ने हिरासत में लिया है। हम शाम 7 बजे से कोतवाली थाना के सामने खड़े हैं, लेकिन पुलिस अब तक यह नहीं बता रही है कि गिरफ्तारी क्यों की गई।”
उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी से पहले न तो परिवार को सूचना दी गई और न ही संगठन को कोई जानकारी दी गई।“हम अपने नेता से बात करना चाहते हैं। जब तक पुलिस गिरफ्तारी का कारण नहीं बताएगी और उनसे मिलने नहीं देगी, तब तक हम यहीं डटे रहेंगे।”
यह बयान सीधे तौर पर पुलिस की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
10 जून 2024: कैसे भड़की थी आग?
पूरा मामला सतनामी समाज की आस्था से जुड़ा है। गिरौदपुरी से लगे महकोनी के अमर गुफा में जोड़ा जैतखाम काटे जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला दिया था। समाज का आरोप था कि यह उनकी धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है और पुलिस ने इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। इसी नाराजगी के चलते 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन बाद में हालात बेकाबू हो गए।
आग, पत्थर और टूटा प्रशासन
प्रदर्शन के दौरान जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आग लगा दी गई
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संयुक्त जिला कार्यालय और तहसील कार्यालय में तोड़फोड़
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कई सरकारी और निजी वाहन जला दिए गए
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प्रशासनिक अमला जान बचाकर भागता नजर आया
सबसे बड़ा सवाल तब भी उठा था और आज भी है कि
इतनी बड़ी भीड़, इतनी हिंसा और पुलिस पूरी तरह असहाय क्यों दिखी?
13 एफआईआर, 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां… फिर भी अधूरा सच
इस पूरे मामले में सिटी कोतवाली थाना में कुल 13 एफआईआर दर्ज की गईं। अब तक
- पुलिस अब तक 13 एफआईआर मामलों में चालान पेश कर चुकी है
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200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है
- पुलिस ने 1325 पेज और 1200 पेज के दो बड़े चालान अदालत में पेश किए हैं
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कांग्रेस, भीम आर्मी और क्रांति सेना से जुड़े कई पदाधिकारी जेल जा चुके हैं
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ज्यादातर मामलों में पुलिस चालान पेश कर चुकी है
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कुछ मामलों में गवाही की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है
इसके बावजूद सवाल यह है कि क्या पुलिस ने असली साजिशकर्ताओं तक पहुंच बनाई है या सिर्फ भीड़ से चुनिंदा चेहरों को उठाया गया?
एसपी कार्यालय तक को नहीं बख्शा गया
हिंसा के दौरान भीड़ ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आग लगा दी थी। संयुक्त कार्यालय, तहसील कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। कई सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। सरकारी आकलन के अनुसार इस हिंसा में शासन को करीब 13 करोड़ रुपए की क्षति हुई थी। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक हिंसा की घटनाओं में गिनी जाती है।
पुलिस की भूमिका पर पहले भी उठे सवाल
इस मामले में पहले भी पुलिस पर सवाल उठते रहे हैं।
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हिंसा के दौरान पुलिस की तैयारियां नाकाफी क्यों थीं?
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इंटेलिजेंस इनपुट होने के बावजूद सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई?
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क्या जानबूझकर हालात बिगड़ने दिए गए?
इन सवालों के जवाब आज तक नहीं मिले।
अदालत में भी सवालों के घेरे में जांच
15 नवंबर को इस मामले में एक अहम सुनवाई होनी थी। उस दिन मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर अमित पाटले की पहली महत्वपूर्ण गवाही दर्ज होनी थी, लेकिन 10 आरोपियों की गैरमौजूदगी के चलते सुनवाई टल गई। इस देरी ने भी पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। इतनी बड़ी घटना, इतनी भारी चार्जशीट और फिर भी गवाही का टलना, क्या यह सिस्टम की कमजोरी नहीं दर्शाता?
नई पुलिस हिरासत से पुराने जख्म फिर हरे
अजय यादव और दिनेश वर्मा की पुलिस हिरासत ने इस मामले को एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुलिस अब उन चेहरों तक पहुंच रही है, जिन पर पहले हाथ डालने से बचा गया था, या फिर यह कार्रवाई चयनित है? पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है।
कोतवाली और पुलिस लाइन में भारी सुरक्षा
शनिवार रात करीब 7 बजे से कोतवाली थाना और पुलिस लाइन के आसपास पुलिस बल तैनात रहा। आजाक थाना परिसर में भी गतिविधियां तेज नजर आईं। हालांकि पुलिस की ओर से कोई लिखित या मौखिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था यह साफ संकेत दे रही थी कि मामला संवेदनशील है। एक ओर कार्यकर्ता थाने के बाहर डटे हुए थे, दूसरी ओर पुलिस की चुप्पी हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना रही थी।
अब सवाल यह नहीं है कि पुलिस कस्टडी हुई या नहीं, सवाल यह है कि
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क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है?
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क्या सभी पक्षों को समान रूप से सुना जा रहा है?
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या फिर यह चयनित कार्रवाई है?
पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है।
Chhattisgarh Talk का निष्कर्ष: कार्रवाई या दबाव?
बलौदाबाजार आगजनी मामला सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का भी सवाल है। पुलिस की यह ताजा कार्रवाई अगर ठोस सबूतों पर आधारित है, तो उसे खुलकर सामने आना चाहिए। लेकिन अगर यह कार्रवाई दबाव, राजनीति या चयनित टारगेटिंग का हिस्सा है, तो यह और भी गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल, कोतवाली थाना के बाहर खड़े कार्यकर्ता, पुलिस की चुप्पी और अचानक हुई एक्शन ने यह साफ कर दिया है कि बलौदाबाजार आगजनी मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि पुलिस कब सामने आकर सच्चाई बताएगी और क्या यह कार्रवाई अदालत में टिक पाएगी।
📍बलौदाबाजार से चंदु वर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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