



बलौदा बाजार में सीमेंट संयंत्रों के कारण गांवों के जल स्रोत सूख रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम की खबर के बाद कलेक्टर ने लिया बड़ा एक्शन। जानें पूरी रिपोर्ट!
बालगोविंद मार्कण्डेय, बलौदा बाजार: छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम द्वारा प्रकाशित जल संकट की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया, और कलेक्टर दीपक सोनी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बलौदा बाजार सीमेंट संयंत्रों और क्रेशर खनन क्षेत्रों के आसपास पेयजल संकट के निराकरण के लिए एक विशेष समिति गठित की। यह समिति 15 दिनों के भीतर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी, जांच करेगी और समाधान के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
कैसे कलेक्टर ने लिया एक्शन?
बलौदा बाजार जिले में संचालित सीमेंट संयंत्रों और खदानों के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में तालाब, कुएं, हैंडपंप और बोरवेल सूख रहे हैं। छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम की रिपोर्ट के बाद कलेक्टर दीपक सोनी ने संज्ञान लेते हुए पेयजल और कृषि निस्तारी की समस्या के समाधान के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया।
बलौदा बाजार सीमेंट संयंत्रों और क्रेशर खनन क्षेत्रो की जांच समिति में कौन-कौन शामिल?
कलेक्टर द्वारा गठित इस विशेष समिति में कई विभागों के अधिकारी शामिल किए गए हैं:
✔ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) – समिति के अध्यक्ष
✔ उप संचालक, खनिज प्रशासन – सदस्य सचिव
✔ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता
✔ जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता
✔ उप संचालक कृषि विभाग
✔ महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र
✔ सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा
✔ नोडल अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल रायपुर
बलौदा बाजार सीमेंट संयंत्रों: छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम की खबर के बाद कलेक्टर ने क्या आदेश दिए?
➡ समिति 15 दिनों के भीतर सीमेंट संयंत्रों और खनन क्षेत्रों का दौरा करेगी।
➡ पेयजल और कृषि जल संकट की सटीक जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करेगी।
➡ अगर किसी क्षेत्र में गंभीर जल संकट पाया जाता है, तो संबंधित कंपनियों और प्रशासन से समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।
➡ रिपोर्ट के आधार पर जल संरक्षण और आपूर्ति की ठोस योजना बनाई जाएगी।
क्या था पूरा मामला?
19 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम ने चलाई थी यह खबर
छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम की खबर का असर: बलौदा बाजार जिले में सीमेंट कंपनियों की अंधाधुंध खुदाई और ब्लास्टिंग से भूजल स्तर गिरता जा रहा है। गांवों के तालाब, कुएं, हैंडपंप और बोरवेल सूख रहे हैं, जबकि सीमेंट संयंत्रों की गहरी खदानों में हजारों लीटर पानी जमा हो रहा है। इस कारण ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
कैसे और क्यों बढ़ा जल संकट?
1. अंधाधुंध खुदाई और गहरी ब्लास्टिंग से भूजल स्तर गिरा
➡ बलौदा बाजार में 7 बड़ी सीमेंट कंपनियों के दर्जनों खदानें हैं।
➡ गहरी खुदाई और ब्लास्टिंग के कारण चट्टानों में दरारें आ गईं, जिससे गांवों का पानी खदानों में रिस रहा है।
➡ जल स्तर 500-700 फीट तक नीचे चला गया, जिससे नए बोरवेल, तालाब भी सूख रहे हैं।
2. हजारों लीटर पानी का अवैध दोहन
➡ बलौदा बाजार सीमेंट संयंत्रों ने अपने खदानों में हजारों लीटर पानी कैद कर लिया।
➡ इसका उपयोग वे मशीनों को ठंडा करने और अन्य उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं, लेकिन गांवों में पानी नहीं बचा।
➡ नियमों के बावजूद कंपनियां जल संरक्षण के उपाय नहीं कर रही हैं।

बलौदा बाजार सीमेंट संयंत्रों की वजह से जल संकट: गांवों में सूखते जल स्रोत
✔ गांवों के ट्यूबवेल और हैंडपंपों से पानी आना बंद।
✔ तालाबों का जलस्तर तेजी से गिरा, जिससे पानी गंदा और बदबूदार हो गया।
✔ पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं, जिससे वन्यजीवों और ग्रामीण पशुओं को भी संकट झेलना पड़ रहा है।
✔ रबी फसल की खेती पर भी असर, किसान पानी की कमी के कारण फसल उगाने से पीछे हटने लगे।
पहले भी हुई थी ऐसी लापरवाही!
12 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ टॉक डॉट कॉम ने चलाई थी यह खबर
➡ बलौदा बाजार के 26 में से 20 जलाशयों में पानी नहीं, ग्रामीणों में चिंता बढ़ी।
➡ गर्मी शुरू होने से पहले ही जिले के जलाशय सूखने की कगार पर।
➡ सबसे बड़े जलाशयों में पानी 10-30% ही बचा, अप्रैल-जून में संकट और बढ़ेगा।
क्या सीमेंट कंपनियां केवल मुनाफा कमा रही हैं?
➡ संयंत्रों ने स्थापना के समय पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े वादे किए थे।
➡ हकीकत में जल संरक्षण के उपाय न के बराबर, केवल अपने उद्योगों के लिए जल का उपयोग कर रहे हैं।
➡ जिले का तापमान भी बढ़ रहा है, जिससे जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं।
प्रशासन, कंपनियां और सरकार अब क्या करें?
✔ संयंत्रों को उनके खदानों में जमा पानी ग्रामीणों के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए।
✔ गांवों में जलापूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों पर काम किया जाए।
✔ सरकार को जल संरक्षण की सख्त नीतियां लागू करनी चाहिए।

अब सवाल यह उठता है कि…
❓ क्या सरकार इस जल संकट को हल करने के लिए ठोस कदम उठाएगी?
❓ क्या सीमेंट कंपनियां अपने खदानों का पानी ग्रामीणों को देंगी?
❓ क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि गंभीर समस्या का समाधान निकालेंगे?
अगर जल संकट का समाधान जल्द नहीं निकला, तो आने वाले वर्षों में बलौदा बाजार बंजर भूमि में बदल सकता है।
अब समय है कि प्रशासन, सरकार और सीमेंट कंपनियां जिम्मेदारी निभाएं और जल संकट का स्थायी समाधान निकालें!
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