
बलौदाबाजार। जिला पुलिस ने ग्राम बिनौरी में हुए अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान 37 वर्षीय रामकुमार साय के रूप में हुई है, जिसकी हत्या की साजिश किसी और ने नहीं बल्कि उसकी अपनी पत्नी, बड़े भाई और एक अन्य रिश्तेदार ने मिलकर रची थी।
घटना का संक्षिप्त विवरण
दिनांक 29 मार्च 2026 की रात लगभग 11:00 बजे से 30 मार्च की रात 02:30 बजे के बीच रामकुमार साय की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। शुरुआत में मृतक की पत्नी मीना बाई ने ही पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मर्ग कायम कर शव का पंचनामा किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मौत का कारण गला घोंटना (होमिसाइडल) बताया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह सामान्य मृत्यु नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है।
पुलिस की मनोवैज्ञानिक रणनीति और सफलता
पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देशन में पलारी पुलिस ने जांच शुरू की। आरोपी पूरी तैयारी के साथ पुलिस के सवालों का जवाब दे रहे थे और साक्ष्य छुपाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने मनोवैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक पूछताछ का सहारा लिया। भावनात्मक और निरंतर पूछे गए सवालों के जाल में आरोपी उलझ गए और आखिरकार उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
हत्या के पीछे की मुख्य वजह
जांच में यह तथ्य सामने आया कि मृतक रामकुमार साय अत्यधिक शराब पीने का आदी था। वह आए दिन घर में परिजनों के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करता था। आरोपियों ने बताया कि मृतक की अपनी ही बेटी पर भी बुरी नियत थी, जिससे तंग आकर परिजनों ने उसे रास्ते से हटाने का फैसला किया।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
योजना के अनुसार, जब रामकुमार सो गया, तब पत्नी मीना बाई साय, बड़े भाई महावीर साय और रिश्तेदार वैभव उर्फ अंशु ने मिलकर गमछे से उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उन्होंने प्रयुक्त गमछे को पत्थरों से बांधकर पास के एक कुएं में फेंक दिया था। वारदात के बाद एक आरोपी वैभव रायपुर भाग गया था, जिसे पलारी पुलिस ने समझदारी से तलब किया।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण:
- महावीर साय (40 वर्ष) – मृतक का बड़ा भाई
- मीना बाई साय (36 वर्ष) – मृतक की पत्नी
- वैभव उर्फ अंशु बघेल (19 वर्ष) – रिश्तेदार
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कुएं से हत्या में प्रयुक्त तीन नग गमछे और पत्थर बरामद किए हैं। साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 61(2) और 238 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
विशेष योगदान: इस अंधे कत्ल को सुलझाने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह, एसडीओपी अपूर्वा क्षत्रिय, थाना प्रभारी परिवेश तिवारी, सउनि राजेश कुमार सेन, आर. संजय गुप्ता, कृष्णा यादव, पूनाराम घृतलहरे एवं वैज्ञानिक अधिकारी सीन आफ क्राईम यूनिट बलौदाबाजार राजीव पंकज और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।






















