यूसीसी पर मंथन: समान नागरिक संहिता के प्रावधानों और प्रभावों पर हुई समूह चर्चा
विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत और लिव-इन संबंध जैसे व्यक्तिगत विषयों को लेकर समान कानून पर चर्चा
नेमिश अग्रवाल राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर प्रक्रिया तेज होती नजर आ रही है। राजनांदगांव में 9 सितंबर को जिला पंचायत सभाकक्ष में यूसीसी के प्रावधानों और संभावित प्रभावों को लेकर परिचयात्मक बैठक एवं समूह चर्चा आयोजित की गई। बैठक में राजनांदगांव सहित कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के संगठन प्रमुख शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है। शासन की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों की मौजूदगी में बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में परिचयात्मक बैठक और समूह चर्चा हुई।
बैठक में विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत और लिव-इन संबंध जैसे व्यक्तिगत विषयों को लेकर समान कानून की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों और पारंपरिक प्रथाओं से जुड़े पहलुओं को भी चर्चा में शामिल किया गया।
यूसीसी के तहत धर्म और समुदाय के आधार पर व्यक्तिगत मामलों में अलग-अलग नियमों के बजाय समान कानूनी व्यवस्था बनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। समिति का उद्देश्य विभिन्न वर्गों से सुझाव लेकर इसके सामाजिक और व्यावहारिक प्रभावों को समझना है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यूसीसी का दायरा धार्मिक पूजा-पद्धति, धार्मिक स्थलों, त्योहारों या उपासना की व्यक्तिगत प्रथाओं को बदलने से संबंधित नहीं है। इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों पर है।
छत्तीसगढ़ शासन ने समान नागरिक संहिता के अध्ययन और परीक्षण के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की है। समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंवाद, विचार-विमर्श, ऑनलाइन सुझाव और फील्ड स्टडी के जरिए अलग-अलग वर्गों की राय जुटा रही है।
राजनांदगांव में हुई यह बैठक भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही, जहां यूसीसी के संभावित प्रावधानों और उनके प्रभावों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।





























